जीका वायरस टेस्टिंग

जीका वायरस के लक्षण, गर्भवती महिलाओं में इसका घातक असर

जीका बुखार या जीका बीमारी के रूप से कुख्यात बीमारी जीका वायरस के कारण होती है। जीका वायरस फ्लाविविरिडए विषाणु परिवार से सम्बन्ध रखता है। इंसानो में यह बीमारी सामान्य बुखार/ ज्वार के रूप में आता है। परन्तु इसके लक्षण सामान्य बुखार से अलग होते है।

डेंगू बुखार की तरह यह बीमारी भी एडीज मच्छर के काटने से होती है। यह मच्छर दिन के समय ज्यादा सक्रीय रहते है। जीका बुखार और डेंगू बुखार के लक्षणों में बहुत अंतर होता है, जिसका वर्णन आपको लेख में आगे पढ़ने को मिलेगा।

जीका वायरस के पीछे का इतिहास

पूर्वी अफ्रीकी विषाणु अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों को वर्ष 1947  में पीले बुखार की शोध के दौरान एक नए वायरस का पता चला था। उस समय यह वायरस एक रीसस मकाक नामक लंगूर की प्रजाति में पाया गया था, जिसकी वजह से वह लंगूर बुखार से पीड़ित था। वर्ष 1952 इस लंगूर में पाए गए वायरस को जीका वायरस का नाम दिया गया।

इंसानो में जीका वायरस का पहला संक्रमण वर्ष 1954 में नाइजीरिया में सामने आया है। वर्ष 2007 में जीका वायरस का पहला प्रकोप अफ्रीका और एशिया में देखने को मिला। यहाँ ‘यप’ नामक एक द्वीप में लाल चकत्ते, नेत्रश्लेष्मलाशोथ, और जोड़ों के दर्द के लक्षणों के साथ बहुत से रोगी मिले। जिसे पहले तो डेंगू या चिकनगुनिया का बुखार समझ कर उपचार किया जाने लगा। लेकिन लोगों के रक्त जाँच में इस बीमारी में जीका वायरस के आरएनए मिले। हालाँकि इस बीमारी से किसी की मृत्यु की जानकारी नहीं है।

इसके बाद इस वायरस का प्रकोप वर्ष 2013 में फ्रेंच पोलीनीशिया तथा अमेरिका के ब्राज़ील और कोलोम्बिया व अफ्रीका के केप वेर्डे में देखने को मिला। जहाँ जीका बीमारी के 110 मामले प्रकाश में आए। वर्ष 2015 में जीका बीमारी ने ब्राजील में अपना प्रभाव दिखाया। इसका अबतक सबसे तेज असर वर्ष 2016 के प्रारम्भ में देखने को मिला जब इसके रोगियों की संख्या 3000 तक पहुँच गई। अबतक जीका वायरस संक्रमण के रोगी 86 देशों में होने के प्रमाण मिले है।

जीका वायरस भी मच्छर के काटने से फैलता

यह बीमारी भी डेंगू की ही तरह संचारी बीमारी है। जीका वायरस भी एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। एडीज मच्छर आमतौर पर दिन में काटते है, जिनका प्रकोप सुबह और शाम को ज्यादा बढ़ जाता है। यह वही मच्छर है जो डेंगू, चिकनगुनिया और पीली बुखार को भी फैलता है। जीका वायरस गर्भावस्था के दौरान माँ से भ्रूण में, यौन संपर्क, रक्त और रक्त उत्पादों के आधान और अंग प्रत्यारोपण के माध्यम से हस्तांतरित हो सकता है।

जीका वायरस के लक्षण क्या है?

इस रोग से प्रभावित व्यक्ति में संक्रमण लक्षण 3-14 दिनों में दिखने लगता है। लेकिन अधिकतकर मामलों में रोगी में जीका बुखार के लक्षण दिखाई नहीं देते है। यहाँ तक की बहुत बार रोगी कोई भी लक्षण विकसित नहीं करते है। जिससे जीका बुखार का पता लगाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। लेकिन अगर रोगी में निम्नलिखित लक्षण देखे दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

  • रोगी को सामान्य/ हल्का बुखार का बने रहना
  • शरीर पर लाल चकते पड़ना
  • रोगी के आँखों का लाल हो जाना
  • आँखों से लगातार पानी निकलना
  • रोगी को बेचैनी महसूस होना
  • जोड़ों और शरीर में दर्द होना
  • सिरदर्द होना

जीका वायरस के बचाव के उपाय

डेंगू बुखार की तरह ही यह बीमारी भी मच्छर के काटने से होती है। जिस प्रकार हम डेंगू मच्छर से अपना बचाव करते है उसी प्रकार हमें जीका वायरस से भी बचने का प्रयास करना चाहिए। मच्छरों के पनपने/ प्रजजन के रोकथाम के साथ साथ हमें अपने आपको उनके काटने से बचाने के सभी उपाय करने चाहिए। जैसे कि:-

  • एडीज मच्छर दिन और शाम के समय ज्यादा सक्रीय रहते है। इसीलिए इस समय खुद को इनसे काटे जाने से बचने के लिए विशेष उपाय करने चाहिए।
  • गर्भवती महिलाओं, प्रजनन आयु की महिलाओं एवं बच्चों को विशेष रूप से सुरक्षित करना चाहिए।
  • व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए हलके और पूरे शरीर को ढकने वाले कपडे पहनने चाहिए।
  • घरों के दरवाजों और खिड़कियों पर मच्छर रोधी महीन जाली का प्रयोग करना चाहिए।
  • शरीर के खुले भागों पर मच्छर रोधी प्रमाणित क्रीम लगनी चाहिए।
  • दिन या रात में जब भी सोएं, मच्छरदानी का प्रयोग जरूर करें।
  • जीका वायरस प्रभावित क्षेत्रों में जाने से बचे।
  • घरों, कार्यस्थलों और स्कूलों के आसपास सफाई रखें और पानी का संग्रह होने से रोके। ऐसा करने से मच्छरों के प्रजजन को रोकने में मदद मिलेगी।
  • जल भण्डारण के बर्तनों को ढक कर रखें।
  • नियमित रूप से कीटनाशकों का छिटकाव करें।
  • घर के कूलर, गमलों आदि का पानी सप्ताह में एक बार जरूर बदलें।
  • आसपास की नालियों में पानी जमा न होने दें। अगर सफाई संभव न हो तो, सप्ताह में एक बार उसपर पेट्रोल या केरोसिन का तेल डाल दें। ऐसा करने से मच्छर के लार्वा मर जाते है।

जीका वायरस बीमारी की मुख्य जटिलताएं

जीका वायरस मच्छर बाईट गर्भवती महिला

यह वायरस गर्भावस्था के दौरान माँ से बच्चे को संक्रमित कर सकता है। जिसके कारण विकासशील शिशु में माइक्रोसेफली और अन्य जन्मजात असामान्यता उत्पन्न हो सकती है। जीका वायरस के कारण गर्भावस्था के दौरान भ्रूण की हानि, स्टिलबर्थ और प्रीटरम जन्म आदि की समस्याएं भी हो सकती है। इसके अलावा जीका वायरस गुइलेन-बैर सिंड्रोम, न्यूरोपैथी और मायलाइटिस बीमारी के ट्रिगर के रूप में भी कार्य करता है। जोकि विशेष रूप से वयस्कों एवं बच्चों को प्रभावित करती है।

इसके अलावा जीका वायरस का संक्रमण संम्भोग के माध्यम से भी प्रेषित होता है। जीका वायरस प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को यौन सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए। विशेषकर गर्भवती या संभावित गर्भवती महिलाओं को इससे परहेज करना चाहिए। यहाँ तक की जीका वायरस संक्रमण के दौरान महिलाओं को गर्भवती होने से भी बचना चाहिए। क्यूंकि जीका वायरस भ्रूण पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

इसके साथ ही जीका वायरस प्रभावित क्षेत्रों में रक्त के आदान प्रदान से बचना चाहिए। क्यूंकि यह वायरस रक्त के जरिये फैल सकता है। रक्त की जरुरत पड़ने पर ब्लड बैंक से प्रमाणित रक्त का ही उपयोग करें।

जीका बुखार का उपचार

जीका वायरस के लक्षण यदि दिखे तो तुरंत डॉक्टर को संपर्क करे। वायरल बुखार होने की वजह से जीका बुखार का कोई प्रमाणित उपचार उपलब्ध नहीं है। जीका बुखार से पीड़ित रोगी का आम दवाओं से उपचार किया जाता है। रोगी को भरपूर आराम और तरल पदार्थों के सेवन का परामर्श दिया जाता है। यदि रोगी की हालत बिगड़ती है तो उसको चिकत्सीय देखभाल के लिए अस्पताल में भर्ती कर देना चाहिए।

निष्कर्ष

वायरल बुखार होने की वजह से जीका वायरस का कोई प्रभावी उपचार अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाया है। परन्तु जीका वायरस के संक्रमण, रोकथाम और नियंत्रण के लिए निरंतर अनुसन्धान जारी है। जबतक इस बीमारी का कोई सफल और प्रमाणित उपचार नहीं मिल जाता है, हमें अपने आपको मच्छरों द्वारा काटने से बचाना होगा। क्यूंकि इस बीमारी से बचने का यही एक मात्रा रास्ता है।

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