सनातन धर्म को कलंकित करते विज्ञापन

सनातन धर्म, हिंदू भावनावों को आहत करते प्रतिष्ठित ब्रांड

अपने उत्पादों के प्रचार प्रसार के लिए विज्ञापन हमेशा से लोकप्रिय रहे है। विज्ञापन सामाजिक परिस्थियों का उपयोग करके आपके रोजमर्रा की स्थितियों और परिदृश्यों को चित्रित करते है कि कैसे एक विशेष उत्पाद आपके दैनिक जीवन में फिट बैठेगा। अपने उत्पादों को लोगों तक पहुंचने का ये एक अच्छा माध्यम है।

भारत एक लोकतान्त्रिक देश है। यहाँ लोगों को अपनी रचनात्मक अभिव्यक्तियों को व्यक्त करने की पूरी आजादी है। लेकिन अभिवयक्ति की आजादी का यह मतलब कतई नहीं है कि आप किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुचायें। परन्तु हाल के दिनों में हिंदू धर्म और उसकी धार्मिक भावनाओं और मान्यताओं को आहात करने की होड़ लग गई है।

पिछले कुछ वर्षों में प्रतिष्ठित ब्रांडो द्वारा ऐसे विज्ञापन प्रस्तुत किए है जिन्होंने सीधे सीधे हिंदू धार्मिक भावनाओं को आहात किया है। अब सवाल यह उठता है कि क्या रचनात्मक अभिवयक्ति के आड़ में प्रतिष्ठित ब्रांडो द्वारा ऐसा करना उचित है। क्यूँ हरबार बारबार इन विज्ञापनों में हिन्दू धर्म को ही लक्षित किया जाता है? क्या ऐसा किसी पूर्व नियोजित षड़यंत्र का हिस्सा है? क्या हिन्दुओं की सहिष्णुता का गलत फायदा उठाया जा रहा है? ऐसे बहुत से ज्वलंत सवाल है जिसका जवाब जल्दी मिलना बहुत जरुरी है।

विवादास्पद विज्ञापन जिन्होंने हिंदू धार्मिक भावनाओं को आहत किया

लेकिन पहले आइए हम आपको बताते है कि वो कौन से विज्ञापन है जिन्होंने सनातन धर्म को बदनाम करने की कोशिश की है। इसके बाद हम उपरोक्त सवालों का जवाब पाने की कोशिश करेंगे।

फैबइंडिया – जश्न-ए-रिवाज़’ नाम से दीवाली का विज्ञापन

हिंदुओं के त्योहारों को ‘विकृत’ करने का सबसे ताज़ा उदहारण फैबइंडिया द्वारा जारी किया गया ‘जश्न-ए-रिवाज़’ नाम से दीवाली का विज्ञापन है। फैबइंडिया ने अपने कपड़ों का प्रचार करने के लिए दीवाली थीम पर एक विज्ञापन निकाला और इसे ‘जश्न-ए-रिवाज़’ नाम दिया।

लोगों ने ब्रांड को हिन्दुओं के त्यौहार को ‘जश्न-ए-रिवाज़’ करार देने पर आपत्ति जताई। लोगों ने ब्रांड के इस प्रयास को “सांस्कृतिक रूप से अनुचित” बताया। भाजपा नेता तेजस्वी सूर्या ने ब्रांड पर हिंदू त्योहारों के ‘अब्राहमकरण के जानबूझकर प्रयास’ का आरोप लगाया।

फैबइंडिया - जश्न-ए-रिवाज़

डाबर – समलैंगिक जोड़े के करवाचौथ का विज्ञापन

अक्टूबर 2021 में डाबर के ब्यूटी ब्रांड फेम ने एक विज्ञापन जारी किया। विज्ञापन की थीम हिन्दुओं का त्यौहार करवाचौथ था। विज्ञापन में एक समलैंगिक जोड़े को करवाचौथ का व्रत रखते और एक दूसरे को एक छलनी के माध्यम से देखना दिखाया गया है।

करवाचौथ हिंदू महिलाओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार होता है। ये त्यौहार वो अपने पति की लम्बी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती है। परन्तु इस विज्ञापन के जरिए हिन्दू मान्यताओं का मजाक उड़ाया किया गया है। ये विज्ञापन हिंदू महिलाओं की आस्था पर कुठाराघात की तरह है। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा द्वारा फर्म के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी के बाद कंपनी ने इस विज्ञापन प्रसार बंद कर दिया।

डाबर - समलैंगिक जोड़े के करवाचौथ

मान्यवर – “कन्यामान” विज्ञापन

कपड़ों के ब्रांड मान्यवर-मोहे ने अक्टूबर 2021 में शादी का एक विज्ञापन प्रस्तुत किया। विज्ञापन में बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट को शादी के ‘मंडप’ में दिखाया गया है। जहाँ वह शादी की “कन्यादान” रस्म की प्रतीक्षा करती दिखाई गई है। विज्ञापन में लड़कियों को बोझ के रूप में दिखाया गया है और कन्यादान को उससे बोझ से छुटकारे का उपाय बताया है।

कन्यादान हिन्दू विवाह का एक अभिन्न अंग है। कन्यादान करके माता-पिता अपने जीवन को सफल मानते है। लेकिन विज्ञापन में कन्यादान की प्रथा को प्रतिगामी बताते हुए हिन्दू विवाह अनुष्ठानों पर हमला किया गया है। कन्यादान को अलग-अलग धर्मों में अलग-अलग नाम से जाना जा सकता है। परन्तु सबका औचित्य एक ही है। शादी करके लड़की को विदा करना। फिर ऐसे विज्ञापनों में हिन्दू धर्म को ही क्यूँ लक्षित किया जाता है?

मान्यवर - कन्यामान

नायका का नवरात्री पर विज्ञापन

कॉस्मेटिक्स ई-कॉमर्स की कंपनी नायका ने इस वर्ष, अक्टूबर 2021, में शुभ नवरात्री के अवसर पर कंडोम और ल्यूब पर 40 प्रतिशत की छूट की घोषणा की। क्यूंकि इसके जैसी कंपनियां हिन्दुओं के त्योहारों को मौद्रिक लाभ के अवसरों के रूप में देखती है। उनको हिन्दुओं की भावनाओं से कोई सरोकार नहीं है।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि नवरात्री के पवित्र त्यौहार को यौन सुख से जोड़ने की कोशिश की गई है। विभिन्न कंपनियां इस दौरान कंडोम की बिक्री से मुनाफा कमाने के लिए ऐसे विज्ञापनों का सहारा लेती आयी है। इनकी नज़रों में नवरात्री एक धार्मिक पर्व न होकर एक नाच गाने का त्यौहार है। इनकी यही सोच इनके विज्ञापनों में दिखाई देती है।

नायका का नवरात्री पर विज्ञापन

सिएट टायर्स का दीवाली पर विज्ञापन

सितम्बर 2021 में तैयार निर्माता कंपनी सिएट ने अपने विज्ञापन में हिन्दुओं को दीवाली पर पटाखा न चलने की सलाह दी है। सिएट में अभिनेता आमिर खान को भारीतय क्रिकेट के के समर्थक के रूप में दर्शाया गया है। जिसमें आमिर खान कहता है कि “अनार, सुतली बम, चक्रघिनी – आज अगर हमारी टीम छक्के मारेगी, तो हम पटाखे भी फोड़ेंगे। पर कहा? समाज के अंदर। सड़कें पटाखे फोड़ने के लिए नहीं हैं। यह यातायात के लिए है।”

इसी प्रकार एक अन्य विज्ञापन में आमिर खान हिन्दू शादी की बरात के लिए टिपण्णी करते हुए कहता है कि “सड़क पर कोई भी नागिन नहीं बनेगा। यह वीर जवानों का देश है। आज मेरे दोस्तों की शादी है। जो होगा, फुटपाथ पर होगा। मामला सुरक्षा को लेकर है। सड़क सिर्फ यातायात के लिए है। ”

सिएट टायर्स के विज्ञापन का संज्ञान लेते हुए कर्नाटक के एक सांसद ने सिएट टायर्स के सीईओ को पत्र लिखकर सड़कों पर पटाखें न जलाने की सलाह पर सवाल उठाया, जबकि नमाज अदा करने वाले अक्सर सड़कों को अवरुद्ध करते रहते है। उन्होंने आगे कहा की ऐसे विज्ञापन “हिंदुओं के बीच अशांति” पैदा करने वाला है और आशा व्यक्त की भविष्य में संगठन “हिन्दुओं की भावनाओं” का सम्मान करेगा।

अब यहाँ सवाल यह उठता है कि क्या सिएट टायर्स या आमिर खान के पास हिन्दुओं की भावनाएं आहत करने का नैतिक आधार है। आखिर क्यूँ आमिर खान ने कभी अपने धर्म के रीती-रिवाजों के खिलाफ एक शब्द नहीं बोला। सच्चाई आपसब अच्छे तरह से जानते है।

सिएट टायर्स का दीवाली पर विज्ञापन

तनिष्क दिवाली विज्ञापन

साल 2020 में दीवाली के अवसर पर तनिष्क ने एक दीवाली-विशेष विज्ञापन प्रदर्शित किया। इस विज्ञापन में अभिनेत्रियों को दीवाली के बारें में बोलने को कहा गया है। जिसमें सभी पटाखा मुक्त दीवाली मनाने का आग्रह करती है। हिन्दुओं के त्योहारों में इस तरह की सलाह देना कोई नई बात नहीं है। लोगों को तनिष्क की दीवाली मनाने की “सलाह” की आलोचना की।

नव वर्ष में दीवाली से ज्यादा पटाखे चलाये जाते है। इसके अलावा अन्य धर्मों में त्यौहार के दौराण जानवरों पर हिंसा की जाती है। परन्तु तनिष्क ने आजतक उनको नसीहत देना उचित नहीं समझा। फिर क्यूँ हिन्दू त्योहार पर ही इन्हें ये सब ध्यान आता है।

तनिष्क दिवाली विज्ञापन

तनिष्क – ‘एकत्वम’ आभूषण का विज्ञापन

09 अक्टूबर 2020 को तनिष्क ने ‘एकत्वम’ नाम से एक अंतर्धार्मिक विवाह का विज्ञापन पेश किया। विज्ञापन में एक हिन्दू महिला को मुस्लिम परिवार की बहू के रूप में दर्शया गया था। विज्ञापन में मुस्लिम परिवार अपनी गर्भवती हिन्दू बहू के लिए गोद भराई की रस्म का आयोजन करते है। विज्ञापन को “दो अलग-अलग धर्मों, परंपराओं, संस्कृतियों का एक सुंदर संगम” बताते हुए, तनिष्क द्वारा प्रदर्शित किया गया।

विज्ञापन का विवरण कुछ इस प्रकार था – उसकी (हिन्दू लड़की की) शादी एक ऐसे परिवार में हुई है जो उसे अपने बच्चे की तरह प्यार करता है। केवल उसके लिए, वे एक ऐसा अवसर मनाने के लिए अपने रास्ते से हट जाते हैं जो वे आमतौर पर नहीं करते हैं। दो अलग-अलग धर्मों, परंपराओं, संस्कृतियों का सुंदर संगम।”

यह उठता है कि क्यूँ इस विज्ञापन में हिन्दू बहू और मुस्लिम परिवार को दर्शाया गया जबकि पहले से ही देश में “लव जिहाद” पर बहस छिड़ी हुई है। तो क्या आप इस विज्ञापन के जरिये “लव जिहाद” को बढ़ावा देना चाहते है? जब तनिष्क से इसके विपरीत विज्ञापन, यानि की मुस्लिम लड़की हिन्दू परिवार, की मांग उठाई गई तब उन्होंने चुप्पी साध ली।

हिन्दू संगठनों द्वारा पुरजोर विरोध के बाद तनिष्क ने इस विज्ञापन को वापस ले लिया। यहाँ ध्यान देने वाली एक बात और है कि तनिष्क टाटा समूह का आभूषण ब्रांड है।

तनिष्क

सर्फ एक्सेल – “रंग लाए संग” विज्ञापन

हिन्दू पर्व होली के दौरान मार्च 2019 में सर्फ एक्सेल ने “रंग लाए संग” नाम से एक विज्ञापन प्रदर्शित किया था। इस विज्ञापन के जरिये हिन्दू-मुस्लिम एकता को दर्शाया गया था। आलोचकों ने इस विज्ञापन को “हिंदू फ़ोबिक” और “विवादास्पद” के रूप में माना और यह टिपण्णी की कि सर्फ एक्सेल इस विज्ञापन के जरिए “नमाज़ होली से अधिक महत्वपूर्ण है” दर्शाना चाहता है।

हिंदू संगठनों द्वारा हिन्दू-मुस्लिम एकता देखने वाले इस विज्ञापन की भरपूर आलोचना की गई। क्यूंकि बाकी विज्ञापनों की तरह इस विज्ञापन में भी हिन्दू त्यौहार को ही लक्षित किया गया था। क्या एकता प्रदर्शित करने के लिए हिन्दुओं के त्योहारों को निम्न दिखाना जरुरी है? क्या यह हिन्दुओं के प्रति दुर्भावना को नहीं दर्शाता है।

सर्फ एक्सेल - रंग लाए संग विज्ञापन

मैनफोर्स – नवरात्री के पोस्टर पर कंडोम का विज्ञापन

गुजरात के विभिन्न शहरों में मैनकाइंड फार्मा ने नवरात्री उत्सव को चिन्हित करते हुए 500 सार्वजनिक होर्डिंग लगाए। यह घटना सितम्बर 2017 नवरात्री के समय की है। होर्डिंग का शीर्षक था – “आ नवरात्रि रमो परंतु प्रेम थी (यह नवरात्रि खेलो,  लेकिन प्यार के साथ)”, जिसमें अभिनेत्री सनी लियोन का चित्र अंकित था। इस विज्ञापन का थीम नवरात्री के उत्सव के दौरान कंडोम के उपयोग का था।

नवरात्री, जिस समय हिन्दू धर्म के लोग पूरी आस्था और भक्ति के साथ माँ दुर्गा की पूजा अर्चन करते है, ऐसे में मैनकाइंड फार्मा द्वारा प्रदर्शित यह विज्ञापन उनकी किस मानसिकता को दर्शाता है? क्या यह विज्ञापन नवरात्री के त्यौहार की पवित्रता का अपमान नहीं है? जब लोग भक्ति में लीन रहते है उस दौरान आप उनको अनुचित यौन अंतरंगता को बढ़ाने को कह रहे हो।

इस विज्ञापन के विरोध में अखिल भारतीय व्यापारियों के परिसंघ के नेतृत्व में सार्वजनिक प्रदर्शन आयोजित किये गए। अंततः मैनफोर्स ने खेद व्यक्त करते हुए अपने होर्डिंग को तत्काल हटा लिया।

मैनफोर्स - नवरात्री के पोस्टर

जावेद हबीब – हिन्दू धार्मिक प्रतीकों का बाल कटवाने का विज्ञापन

साल 2017 में एक नाई जावेद हबीब, जो खुद को हेयर स्टाइलिस्ट कहता है, ने हिन्दू देवी देवताओं का अखबार में एक विज्ञापन निकाला। यह विज्ञापन दुर्गा पूजा के समय सितम्बर 2017 में प्रकशित हुआ था। इस विज्ञापन में हिंदुओं के धार्मिक प्रतीकों – माँ दुर्गा अपने बच्चों कार्तिक, माता लक्ष्मी, माता सरस्वती और श्री गणेश के साथ जावेद हबीब के सैलून में बाल कटवाते, पैसे गिनते और मेकअप करते दिखाया गया था। और विज्ञापन का शीर्षक था – “भगवान भी जेएच सैलून जाते हैं।”

इस विज्ञापन के जरिए जावेद हबीब ने जानबूझकर हिन्दू भावनाओं को आहत करने की कोशिश की। हबीब के इस विज्ञापन का हिन्दू संगठनों ने विरोध किया और इस बात पर नाराजगी जताई कि क्यूँ हमेशा उनके देवी देवताओं का ही मज़ाक उड़ाया जाता है। विरोध के बाद जावेद हबीब ने अपने कृत्य के लिए मांफी मांगते हुए, विज्ञापन हटा लिया।

हिन्दू धार्मिक प्रतीकों का बाल कटवाने का विज्ञापन

निष्कर्ष

तो आपने देखा कैसे प्रतिष्ठित ब्रांड रचनात्मकता और अभिवयक्ति की आज़ादी का दुरुपयोग हिन्दुओं की भावनाओं को आहत करने में कर रहे है। हिन्दुओं के त्यौहार के आगमन के साथ ही ऐसे ब्रांड हिन्दू विरोधी विज्ञापनों लेकर आ जाते है। जबकि अन्य धर्मों के त्योहारों पर ऐसे विज्ञापन देखने को नहीं मिलते।

नववर्ष पर दीवाली से ज्यादा पटाख़े चलाये जाते है, पर ज्ञान सिर्फ हिन्दुओं को दिया जाता है। होली से ज्यादा पानी की बर्बादी ईद पर होती है, पर ज्ञान सिर्फ हिन्दुओं को क्यूँ? हर एक धर्म में लड़कियां घर से विदा होती है पर कन्यादान पर ज्ञान सिर्फ हिन्दुओं को क्यूँ?

अन्य धर्मों में ऐसी बहुत से कुरीतियां एवं रीती-रिवाज है, जो उनके पिछड़े होने का प्रमाण देती है। परन्तु कभी किसी ब्रांड ने उन कुरीतियों पर आवाज क्यूँ नहीं उठाई। क्यूंकि शायद उन्हें पता है कि ऐसा करते ही हजारों तानाशाही फतवे तुरंत जारी हो जाएंगे और उनके दुकानों एवं व्यावसायिक परिसर तोड़फोड़ दिए जाएंगे।

ये ब्रांड हिन्दुओं की सहनशीलता और धर्मनिरपेक्षता का गलत लाभ उठा रहे है। परन्तु हिंदू धर्म बदनाम करने की इनकी कोशिशें लगातार बढ़ती ही जा रही है। जिसकी वजह से हिन्दू समाज में आक्रोश का माहौल बन रहा है। इससे पहले की ये आक्रोश जनांदोलन का रूप ले लें, सरकार को ऐसे विज्ञापन दाताओं के विरुद्ध सख्त कदम उठाने की जरुरत है।

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