प्रधानमंत्री सुरक्षा चूक

प्रधानमंत्री सुरक्षा चूक मामले ने विरोधिओं के होश उडा दिये

“अपने मुख्यमंत्री को मेरा धन्यवाद् कहना, कि मैं बठिंडा एयरपोर्ट तक जिन्दा लौट आया”- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बठिंडा एयरपोर्ट पर  अधिकारियों से आखिर ऐसा क्यूँ कहना पड़ा? प्रधानमंत्री के पंजाब फिरोजपुर दौरे का सच आखिर क्या है? क्या पीएम की सुरक्षा में वास्तव में कोई चूक हुई है या फिर यह एक सोची समझी साजिश का हिस्सा है? इन सवालों के जवाब जानने के लिए आइए इस घटना को हम विस्तार से समझने की कोशिश करते है।

प्रधानमंत्री का पंजाब फ़िरोज़पुर का दौरा – सुरक्षा में चूक या साज़िश

बुधवार, 05 जनवरी 2022 प्रधानमंत्री अपने पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार पंजाब के फ़िरोज़पुर शहर में एक रैली को सम्बोधित करने वाले थे। इस रैली में प्रधानमंत्री पंजाब के लोगों के लिए 42,750 करोड़ की कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास भी करने वाले थे। बुधवार दोपहर प्रधानमंत्री बठिंडा एयरपोर्ट पर पहुंचे और वह से हेलीकॉप्टर के जरिए फ़िरोज़पुर जाने का कार्यक्रम निर्धारित था।

परन्तु बुधवार को मौसम ख़राब होने की वजह से प्रधनमंत्री को सड़क मार्ग से फ़िरोज़पुर ले जाने का निर्णय हुआ। पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी ने प्रधानमत्री के लिए चुने हुए मार्ग को सुरक्षित बताया। इसके बाद काफिला अपने सफर पर निकल पड़ा। फ़िरोज़पुर रैली में शामिल होने से पहले प्रधानमंत्री हुसैनीवाला स्थित राष्ट्रिय शहीद स्मारक जाने वाले थे।

प्रदर्शनकारियों द्वारा सड़क जाम करना

प्रधानमंत्री का काफिला हुसैनीवाला राष्ट्रीय शहीद स्मारक से लगभग 30 किलोमीटर दूर था। जब पीएम का काफिला एक फ्लाईओवर पर पहुंचा, तो पाया गया कि आगे का मार्ग प्रदर्शनकारियों द्वारा जाम किया हुआ था. जिसके कारण प्रधानमंत्री को 15-20 मिनट तक फ्लाईओवर पर फंसे रहना पड़ा। पंजाब पुलिस द्वारा मार्ग खाली न करवापाने एवं प्रदर्शनकारियों के उग्र नारेबाजी की वजह से सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए काफिले को वापस मुड़ना पड़ा।

प्रधानमंत्री का दौरा रद्द होना

हुसैनीवाला फ्लाईओवर पर जाम की स्थिति के कारण प्रधानमंत्री को अपनी फ़िरोज़पुर रैली को रद्द करके वापस बठिंडा एयरपोर्ट लौटना पड़ा।एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि “अपने मुख्यमंत्री को धन्यवाद कहना की मैं जिन्दा वापस लौट पाया।” ऐसा कहकर प्रधानमंत्री ने अपना दौरा रद्द करके दिल्ली लौट गए।

फ़िरोज़पुर दौरा क्यूँ महत्वपूर्ण था

पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले है। पीएम मोदी फ़िरोज़पुर में चुनावी रैली करने वाले थे। इसके अलावा इसी रैली में प्रधानमंत्री पंजाब के लिए कई विकास परियोजनाओं का भी शिलान्यास करने वाले थे। प्रधानमंत्री को फिरोजपुर में एक पीजीआईएमईआर सैटेलाइट केंद्र और दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे, अमृतसर-ऊना खंड को चार लेन में परिवर्तित करने, मुकेरियां-तलवाड़ा रेल लाइन का आमान परिवर्तन, और कपूरथला एवं होशियारपुर में दो नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना समेत 42 हजार 750 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास करना था। लेकिन रैली रद्द होने के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका।

चुनावी रैली रद्द होना कोई नई बात नहीं है। परन्तु प्रधानमंत्री की सुरक्षा में सेंध लगाकर रैली रद्द करवाना, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है। इसके अलावा फ़िरोज़पुर रैली सिर्फ एक चुनावी रैली नहीं थी बल्कि इसके जरिए प्रधानमंत्री पंजाब को विकास की एक सौगात देने वाले थे। जिसका लाभ निश्चित ही पंजाब की आम जनता को मिलने वाला था।

अब सवाल यह उठता है कि इतनी महत्वपूर्ण रैली के रद्द होने से किसको लाभ होने वाला था? जवाब शायद आप जानते होंगे! लेकिन फिर भी क्या अपने निजी राजनितिक लाभ के लिए प्रधानमंत्री की सुरक्षा से खिलवाड़ करना जायज़ है? आखिर पंजाब में प्रधानमत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी? आइए इन सवालों के जवाब जानने की कोशिश करते है।

प्रधानमंत्री की सुरक्षा किसकी जिम्मेदारी?

देश के प्रधानमंत्री जब भी किसी दौरे पर निकलते है तो उससे सम्बंधित जानकारी उस राज्य के मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, डीजीपी, एसपीजी आदि सम्बंधित अधिकारीयों को प्रेषित की जाती है। प्रक्रिया के अनुसार उन्हें रसद, सुरक्षा के साथ-साथ आकस्मिक योजना तैयार रखने के लिए आवश्यक व्यवस्था करनी होती है। साथ ही आकस्मिक योजना के मद्देनजर सम्बंधित राज्य सरकार को सड़क मार्ग से किसी भी आवागमन को सुरक्षित करने और बंद करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करनी होती है। इसके अलावा प्रधामंत्री की यात्रा मार्ग की सुरक्षा की पूरे जिम्मेदारी भी सम्बंधित राज्य पुलिस की होती है।

फ़िरोज़पुर रैली में प्रधानमंत्री को हवाई मार्ग से जाना था। परन्तु मौसम ख़राब होने की वजह से उनके काफिले को सड़क मार्ग से जाना पड़ा। जिसकी पूर्व सूचना सम्बंधित अधिकारीयों को प्रेषित की गई थी एवं उनसे आवश्यक सुरक्षा प्रबंधों की पुष्टि मिलने के बाद ही यात्रा प्रारम्भ की गई। लेकिन मार्ग के सुरक्षित होने के बावजूद भी काफिले को प्रदर्शनकारियों द्वारा हुसैनीवाला के पास फ्लाईओवर पर रोक लिया गया। जिसके कारण प्रधानमंत्री को अपनी रैली रद्द करनी पड़ी। अब इस घटना को सुरक्षा में चूक समझा जाए या साजिश, निम्न सवालों के माध्यम से इसको समझने की कोशिश करते है।

प्रधानमंत्री की सुरक्षा चूक से जुड़े कुछ सवाल

अब यहाँ कुछ सवाल है जिसका जवाब मिलना जरुरी है: –

  • बठिंडा एयरपोर्ट से प्रधानमंत्री हेलीकॉप्टर के बजाय सड़क मार्ग से जा रहे है। अचानक हुए इस कार्यक्रम परिवर्तन की जानकारी केवल पंजाब पुलिस और सम्बंधित अधिकारियों को ही थी। फिर प्रधानमंत्री का परिवर्तित मार्ग प्रदर्शनकारियों द्वारा कैसे जाम किया गया?
  • प्रदर्शनकारियों को इस परिवर्तित सड़क मार्ग की सूचना कैसे मिली?
  • पीएम के मार्ग में अगर प्रदर्शनकारी पहले से मौजूद थे तो उनको समय रहते हटाया क्यूँ नहीं गया?
  • पीएम के मार्ग में बैठे प्रदर्शनकारी अगर हटने को तैयार नहीं थे तो पीएम का मार्ग परिवर्तित क्यूँ नहीं किया गया?
  • मार्ग में मौजूद प्रदर्शनकारियों के बारें में पीएम के काफिले को समय रहते सूचित क्यूँ नहीं किया गया?
  • पीएम के सड़क मार्ग पर अतिरिक्त सुरक्षा का बंदोबस्त क्यूँ नहीं था?

इन सवालों पर गहराई से विचार करने से पता चलता है कि इस घटना में सुरक्षा में चूक से ज्यादा साजिश की बू आती है। अब सवाल यह उठता है की इस साजिश के आखिर किसको लाभ मिलेगा? इसके अलावा इस घटना को लेकर बहुत से दावे किये जा रहे है। आइए अब हम उन दावों की सच्चाई पर भी एक नजर डालते है।

सुरक्षा में चूक पर दावों की बौछार

पीएम मोदी ने अचानक बदला कार्यक्रम, भीड़ न जुटने से रैली नहीं हो पाई : पंजाब सीएम चरणजीत चन्नी

इस घटना के बारें में सीएम चरणजीत चन्नी का कहना है की उन्होंने प्रधानमंत्री दौरा मार्ग की सभी सड़कें रात 3 बजे तक क्लियर करवाई है। प्रधानमंत्री का हवाई मार्ग से आने का कार्यक्रम था। फ़िरोज़पुर भी हवाई मार्ग से जाने वाले थे। उनका सड़क से जाने का कोई प्रोग्राम नहीं था। उन्होंने बठिंडा आकर अचानक अपना प्रोग्राम बदल लिया और सड़क से जाने का फैसला किया। बिना किसी पूर्व कार्यक्रम के यह सब हुआ। इसमें किसी तरह की सुरक्षा लापरवाही नहीं बरती गई। दूसरा उन्होंने फ़िरोज़पुर में बड़ी रैली का आयोजन किया। जहाँ 7 हजार कुर्सियां रख दी परन्तु आदमी 700 भी नहीं आए। ऊपर से बारिश भी हो रही थी। इस वजह से उनकी रैली कामयाब नही हो पाई।

हमारे विरोध की वजह से कार्यक्रम रद्द – किसानों का दावा

किसान एकता मोर्चा ने बयान जारी कर कहा- हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि मोदी की रैली रद्द होने की वजह किसानों और पंजाब के लोगों का भीषण विरोध है। जिन्होंने मोदी को अस्वीकार कर दिया है। इसकी वजह से प्रधानमंत्री मोदी को अपना कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। पीएम मोदी की रैली में भी बहुत कम लोग मौजूद थे। इनमें से ज्यादातर को तो जबरदस्ती रैली में भेजा गया था। पंजाबियों के निगेटिव रिस्पॉन्स की वजह से मोदी को अपना कार्यक्रम रद्द करना पड़ा।

भाजपा का दावा  – घटना कांग्रेस की साजिश

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस घटना की वजह बताई है। उन्होंने रैली रद्द होने के बाद कई ट्वीट किए। उन्होंने लिखा- “पंजाब की कांग्रेस सरकार विकास विरोधी है और उसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की भी कद्र नहीं है। जो सबसे ज्यादा परेशानी वाली बात थी, वो थी प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक का मसला। प्रदर्शनकारियों को पीएम के रूट में घुसने की इजाजत दी गई। जबकि पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी ने एसपीजी को भरोसा दिया था कि रास्ता सुरक्षित है। मसला सुलझे या इस मुद्दे पर कोई बात हो पाए इसके लिए पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी ने फोन भी नहीं उठाया। कांग्रेस सरकार जो तरीके इस्तेमाल कर रही है, उन्हें देखकर लोकतांत्रिक मूल्यों पर भरोसा करने वाले को दुख होगा।”

प्रधानमंत्री की सुरक्षा में बड़ी चूक – गृह मंत्रालय

प्रधानमंत्री मोदी बठिंडा एयरपोर्ट उतरने के बाद खराब मौसम की वजह से 20 मिनट इंतजार करने के बाद सड़क के जरिए राष्ट्रीय शहीद स्मारक तक जाने का निर्णय लिया। इसमें उन्हें 2 घंटे से ज्यादा का वक्त लगना था। पंजाब के डीजीपी आवश्यक सुरक्षा प्रबंधों की पुष्टि के बाद ही उनका काफिला आगे बढ़ा। हुसैनीवाला में शहीद स्मारक से 30 किलोमीटर पहले उनका काफिला एक फ्लाई ओवर पर पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर रखी थी। जिसकी वजह से प्रधानमंती मोदी को यहां पर 15-20 मिनट तक फंसे रहना पड़ा। यह प्रधानमंत्री की सुरक्षा में बड़ी चूक है।

निष्कर्ष

अब तक हमने इस घटना को विस्तार से समझने की कोशिश की है। बीच-बीच में हमने बहुत से सवाल उठाये है। जिनका जवाब मिलने के बाद ही ये स्पष्ट हो पाएगा कि वाकई यह घटना सुरक्षा में चूक का मामला है या मसला कुछ और है। परन्तु इस घटना का समय अपने आप में पंजाब सरकार की नियत पर कुछ सवालिया निशान खड़े करता है। सवाल जैसेकि:-

  • प्रधानमंत्री की फ़िरोज़पुर रैली को पंजाब चुनावों में भाजपा के चुनाव प्रचार की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा था। ऐसे में इस रैली के रद्द होने से आखिर किसको लाभ होगा?
  • पीएम इस रैली के माध्यम से पंजाब की जनता को कई विकास परियोजनाओं की सौगात देने वाले थे। जोकि निश्चित ही उनके जीवन को प्रभावित करती। निश्चित ही भाजपा को भी पंजाब चुनावों में लाभ मिलता। ऐसे में इस रैली के रद्द होने उन परियोजनाओं का शिलान्यास नहीं हो पाया। ऐसा करके आखिर किसको लाभ होगा?
  • पंजाब के मुख्यमंत्री का इस घटना की जिम्मेदारी लेने के बजाय इस घटना को रैली से जोड़ना भी संदेहजनक है। रैली का सफल होना या न होना वो एक अलग बात है लेकिन रैली स्थल तक पीएम को सुरक्षित पहुंचना मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी है। जिसका पंजाब सीएम ने निष्ठा से निर्वाह नहीं किया।
  • किसान संगठनों के पास पीएम के सड़क मार्ग की सटीक जानकारी होना और सड़क मार्ग को जाम करना एक सुनियोजित योजना का हिस्सा जान पड़ता है। क्यूंकि अचानक मिली जानकारी के बल पर प्रदर्शनकारियों द्वारा इतनी जल्दी सड़क जाम करना संभव नहीं लगता है।

जबतक इस सवालों के जवाब नहीं मिल जाते तबतक यह घटना शक के दायरे में बनी रहेगी। मिली जानकारी के अनुसार गृहमंत्रालय ने सम्बंधित घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। जिसका नेतृत्व सुधीर कुमार सक्सेना, सचिव (सुरक्षा), कैबिनेट सचिवालय करेंगे, जिसमें अन्य सदस्य-बलबीर सिंह, संयुक्त निदेशक, इंटेलिजेंस ब्यूरो और एस. सुरेश, महानिरीक्षक, विशेष सुरक्षा समूह होंगे। अब इस घटना का असली जिम्मेदार कौन है इसका पता जांच समिति के रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा। 

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