हरियाली तीज - शिव पार्वती

हरियाली तीज – सुहागन स्त्रियों के लिए हरियाली तीज वरदान है

हरियाली तीज या श्रावणी तीज, नाग पंचमी से दो दिन पूर्व यानि श्रावण मास की शुक्ल की पक्ष तृतीया को मनाई जाती है। हरियाली तीज भगवान शिव व माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतिक है। इस दिन महिलाएं माता पार्वती की पूर्ण विधि विधान से पूजा करती हैं व व्रत रखती है। साथ ही वह माता पार्वती से सुखी वैवाहिक जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं। इस दिन महिलाएं नए वस्त्र, विशेषतः हरी साड़ी में सजधज कर अपने मायके जाती हैं व तीज के गीत गाते हुए हर्षोल्लास के साथ झूला झूलने का आनन्द लेती हैं।

सावन महीने की पहली अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता है। हरियाली अमावस्या को हरियाली अमावस व हरियाली अमास भी कहते है। इसी दिन हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। यह त्यौहार मुख्यत: उत्तरप्रदेश, राजस्थान व हिमाचल प्रदेश में मनाया जाता है। आंध्रप्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र, कर्णाटक व गुजरात में हरियाली अमावस्या को असाढ़ महीने की अमावास के समय मनाते है। कर्णाटक में इसे भीमाना अमावस्या, महाराष्ट्र में गतारी अमावस्या, केरल में कर्किदाका वावू बाली एवं उड़ीसा में चितालागी अमावस्या के नाम से जाना जाता है।

हरियाली तीज मुख्यत: महिलाओं का पर्व है। सावन के महीने में जब संपूर्ण धरा हरियाली से आच्छादित होती है, तब प्रकृति के इस मनोरम क्षण का आनंद लेने के लिए महिलाएं झूला झूलती हैं और लोक गीत गाकर हरियाली तीज का उत्सव मनाती हैं। हरियाली तीज के अवसर पर देशभर में कई जगह मेले आयोजित किए जाते है एवं माता पार्वती की सवारी धूमधाम से निकाली जाती है। सुहागन स्त्रियों के लिए हरियाली तीज का बहुत महत्त्व है। क्योंकि सौंदर्य और प्रेम का यह उत्सव भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

हरियाली तीज त्यौहार साल 2022 में  कब है

तीज त्यौहार साल 2022 को निम्न तिथियों को पड़ रहे है।

हरियाली तीज – रविवार, 31 जुलाई
कजरी तीज – रविवार, 14 अगस्त
हरतालिका तीज – मंगलवार,  30 अगस्त

हरियाली अमावस्या 30 जुलाई को पड़ रही है। ऐसे में हरियाली तीज रविवार, जुलाई 31, 2022 को मनाई जाएगी।

तृतीया तिथि प्रारम्भ – जुलाई 31, 2022 को रात्रि 02 बजकर 59 मिनट से
तृतीया तिथि समाप्त – अगस्त 01, 2022 को सुबह 04 बजकर 18 मिनट तक

हरियाली तीज पूजा विधि

शिव पुराण के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था। इसलिए सुहागन स्त्रियों के लिए इस व्रत का बड़ा महत्त्व है। इस दिन महिलाएं महादेव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं। हरियाली तीज की पूजा विधि इस प्रकार है: –

  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर घर की अच्छे से साफ़ सफाई करके घर को सजाएं।
  • इसके बाद स्नान करके साफ़ और सुन्दर वस्त्र धारण करने चाहिए।
  • फिर एक चौकी पर मिट्टी में गंगाजल मिलाकर शिवलिंग, भगवान गणेश, माता पार्वती और उनकी सखियों की प्रतिमा बनाएं।
  • इसके बाद सभी प्रतिमाओं को एक चौकी पर स्थापित करें।
  • स्थापना के बाद देवताओं का आह्वान करते हुए षोडशोपचार पूजन करें।
  • हरियाली तीज व्रत का पूजन रातभर चलता है। इस दौरान महिलाएं जागरण करते हुए मंत्रोच्चार व कीर्तन करती हैं।

निर्जला व्रत और हरियाली तीज

हरियाली तीज के दिन महिलाएं ‘निर्जला व्रत’ के नाम से प्रचलित सख्त उपवास भी रखती हैं। इस व्रत को रखने वाली महिलाओं को पूरे दिन पानी पीने की भी अनुमति नहीं है। हरियाली तीज का व्रत विवाहित और अविवाहित दोनों महिलाएं रख सकती हैं। निर्जला व्रत को चंद्रमा की पूजा करने के बाद तोड़ा जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की समृद्धि और कल्याण के लिए माता पार्वती से वरदान मांगती है।

तीन बातों को त्यागने की परंपरा

हरियाली तीज पर हर महिला को तीन बुराइयों को त्यागने का संकल्प लेना चाहिए। ये तीन संकल्प इस प्रकार है: –

  • पति से छल-कपट करना।
  • झूठ बोलना व दुर्व्यवहार करना।
  • परनिंदा (दूसरो की बुराई) करने से बचना।

हरियाली तीज पर होने वाली परंपरा

नवविवाहिता लड़कियों के लिए विवाह उपरांत पड़ने वाले पहले सावन का विशेष महत्व होता है। इस अवसर पर नवविवाहिता लड़कियों को ससुराल से पीहर बुलाया जाता है। हरियाली तीज के एक दिन पहले, जब लड़की के माता-पिता लड़की को विदा कराने उसके ससुराल जाते है, तो वह लड़की के ससुराल वालों को ‘सिंघारा’ उपहार स्वरुप भेंट करते है। सिंधारा में विशेषतः मिठाई, घेवर, मेहँदी, चूड़ियां आदि वस्तुएं भेंट दी जाती है, जोकि लड़की व उसके ससुराल के लिए होती है। क्यूंकि हरियाली तीज के दिन सिंधारा भेंट करने की प्रथा है, इसलिए इस तीज को सिंधारा तीज भी कहा जाता है। इसके अलावा हरियाली तीज को निम्न परम्पराएं प्रचलित है: –

  • ये त्यौहार मेहंदी बिना अधूरा माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने हाथों पर तरह-तरह की कलाकृतियां में मेहंदी लगाती है। इस दिन पैरों में आलता भी लगाया जाता है। यह महिलाओं में सुहाग की निशानी है।
  • इस दिन वट वृक्ष पर झूला टांगा जाता है। हरियाली तीज के अवसर पर झूले झूलने की प्रथा बहुत पुरानी है। इस दिन सभी महिलाएं एक जगह इक्कठी होकर सावन के झूले का मजा लेती है और नाचते हुए सावन के गीत गाती है।
  • इस दिन देश के सभी कोनों में तीज के मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले को विशेषरूप से महिलाओं को ध्यान में रखकर आयोजित किया जाता है। महिलाएं व लड़कियां इस मेले में जाकर बहुत मौज-मस्ती करती है।
  • हरियाली तीज पर सुहागिन स्त्रियां सास के पांव छूकर उन्हें सुहागी देती हैं। यदि सास न हो तो जेठानी या किसी अन्य वृद्धा को दी जाती है।

हरियाली तीज का पौराणिक महत्व

हिन्दू धर्म में हर व्रत, पर्व और त्यौहार का एक पौराणिक एवं आध्यात्मिक महत्व होता है। इसी प्रकार हरियाली तीज को भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। निरंतर कड़ी तपस्या और 108वें जन्म के बाद माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। घार्मिक मान्यता अनुसार, श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को भगवान शंकर ने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया। तभी से, भगवान शिव और माता पार्वती ने इस दिन को सुहागन स्त्रियों के लिए सौभाग्य का दिन होने का वरदान दिया। इसलिए हरियाली तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन और व्रत करने से विवाहित स्त्री सौभाग्यवती रहती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

 

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