pimple

मुहांसे हटाने के असरदार उपचार – Effective treatment for Pimples

पिम्पल जिसे आम भाषा में फुंसी या मुंहासे भी कहा जाता है से हम सब भली भांति परिचित है। किशोर अवस्था के लगभग सभी लड़के और लड़कियां इस संक्रमण से ग्रषित होते है। खासकर लड़किओं को इस संक्रमण से बहुत समस्या होती है। पिम्पल लड़कियों के रुप और सौंदर्य को बिगाड़ देता है। जिससे कई बार उनमें हीनभावना का वास हो जाता है और आत्मविश्वास में कमी आ जाती है। इसीलिए पिम्पल से छुटकारा पाना आवश्यक हो जाता है। बात जब आपके चेहऱे की हो तो रासायनिक उत्पादों की जगह प्राकृतिक पदार्थों का उपयोग करना ज्यादा लाभकारी होता है। सामान्य घरेलू उपाय पिम्पल्स के उपचार में बहुत प्रभावी है। इससे पहले कि हम पिंपल्स के इलाज पर चर्चा करें, आइए जानें कि पिंपल क्या है, क्यूँ होता है और इसको कैसे वर्गीकृत किया गया है।  

पिम्पल क्या है? (What is Pimples?)

पिम्पल या मुंहासे एक तरह का त्वचा का संक्रमण है। पिम्पल्स चेहरे पर ही नही, बल्कि पीठ, गले, कंधे और बगल में भी हो सकते है। तैलाक्त (Oily Skin) युक्त त्वचा में ये संक्रमण ज्यादा देखने को मिलता है। दरअसल होता ये है कि आपकी त्वचा से निकलने वाला अत्यधिक तेल त्वचा की सतह पर मौजूद मृत त्वचा कोशिकाएं (Dead Skin) से मिलकर रोमछिद्रों को बंद कर देते है। जिससे वहाँ पर जीवाणु (Bacteria) पनपने लगते है और उसमें पस बनने लगती है और वो एक दाने के रूप में आपके चहरे पर उभर आती है जिसे पिम्पल या मुँहासे कहा जाता है।

पिम्पल्स होने के कारण (What Causes Pimples)

पिम्पल होने के बहुत से कारण हो सकते है जिसमे अत्यधिक सीबम का उत्पादन होना, त्वचा पर मृत कोशिकाओं का जमा होना, बैक्टीरिया की मौजूदगी, हार्मोनल असंतुलन, ख़राब खानपान, अत्याधिक स्टेरिओड्स का सेवन आदि प्रमुख है। आइए इस कारणों के बारें में विस्तार से बात करते है।  

हार्मोन्स में बदलाव (Hormonal Changes)

जब कोई पुरुष या महिला अपनी किशोरावस्था में कदम रखते है तो उनमें बहुत से हार्मोनल बदलवा देखने को मिलते है। किशोरावस्था में व्यक्ति की शारीरिक संरचना में बदलवा आते है। इन बदलावों की वजह से शरीर की वसामय ग्रंथियां फैल जाती है। जिसकी वजह से यह अधिक सीबम का उत्पादन करने लगते है।  सेक्स हार्मोन्स में होने वाले बदलाव के कारण भी ये ग्रंथियां अतिसक्रिय होकर तेल का उत्पादन बढ़ा देती है। यही अतिरिक्त तेल मृत त्वचा से मिलकर रोमछिद्रों को बंद कर देता है जिससे मुहाँसे निकल आती है।  

ख़राब खानपान (Bad Food Habits)

स्वस्थ शरीर के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार बहुत जरुरी है। परन्तु बदलते समय के साथ हमारे खानपान में भी बहुत परिवर्तन हो गया है। अब हमारे आहार का एक बड़ा हिस्सा जंक या फ़ास्ट फ़ूड ने ले लिया है। जो स्वाद में तो अच्छे होते है पर शरीर पर उनका बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। पेट का ख़राब रहना, कब्ज़, वसा-यकृत्, मधुमेह आदि बहुत सी बीमारियां हो जाती है। अगर आपका पेट ठीक नहीं रहता और कब्ज़ की बीमारी है तो भी आपको पिम्पल्स की समस्या हो सकती है। इसीलिए जरुरी है कि हम पौष्टिक और रेशेदार आहार का सेवन करें। जिससे हमारा पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है और पेट की बिमारियों से राहत मिलती है और साथ ही हमें मुहाँसो से भी छुटकारा मिल जाता है।  

स्टेरॉयड्स का अत्याधिक सेवन (Use of Steroids)

किशोरों में शरीर सौष्ठव (Body Building) के प्रति बहुत ही उत्साह देखने को मिलता है। शरीर को सौष्ठव बनाने के लिए बहुत मेहनत और पौष्टिक आहार की जरुरत होती है। इस प्रक्रिया में बहुत समय भी लगता है। परन्तु किशोरों में शरीर को सौष्ठव बनाने की इतनी जल्दी होती है कि वो पौष्टिक आहार को छोड़कर स्टेरॉयड्स का उपयोग करने लगते है। अत्याधिक स्टेरॉयड्स के उपयोग से शरीर में तीव्र हार्मोनल बदलाव आते है। जिसकी वजह से शरीर पर बहुत से पार्श्व प्रभाव पड़ते है जिसमें से एक मुहाँसे होना भी है।

तनाव (Tension)

तनाव बहुत सी बिमारियों की जड़ है। तनाव के कारण हमारे शरीर में कई तरह के हानिकारक हार्मोन्स का निर्माण होने लगता है। इन हार्मोन्स की वजह से शरीर की वसामय ग्रंथियां से अतिरिक्त तेल निकलने लगता हैं। जोकि आगे चलकर मुहाँसो का रूप धारण कर लेती है।

पिम्पल के प्रकार (Types of Pimples)

मुंहासे कई प्रकार की होती है। इनको इनकी संरचना के हिसाब से विभिन्न वर्गों में बांटा जाता है। मुंहासे आकार में बड़े और छोटे हो सकते है। इनमे पानी या पस भरा हो सकता है। संक्रमण की वजह से कई बार इनमें तेज दर्द के साथ खून भी निकलता है। त्वचा पर होने वाले ब्लैकहेड्स और व्हिटहेड्स को भी मुंहासों की श्रेणी में रखा जाता है। इनमें पानी या पस के बजाये सुखी कील निकलती है। आमतौर पर इनमें दर्द नहीं होता है। आइये हम आपको पिम्पल्स के विभिन्न प्रकारों के बारें में विस्तार से अवगत कराते है। 

फुंसी या दानेदार मुहांसे (Pustule)

हमारे चहरे पर फुंसी ज्यादातर किशोरावस्था में निकलती है। हालाँकि ये बच्चो से लेकर जवान और बूढ़ों तक में हो सकती है। परन्तु ज्यादातर पंद्रह से तीस साल तक की आयु वाले किशोरों में ही मुहांसे निकलती है। ये फुंसी दानेदार होती है और इनमें पानी या पस हो सकता है। उम्र के साथ साथ इनके निकलने की गति काम हो जाती है और ये स्वतः ठीक हो जाते है। परन्तु अगर आपका खानपान संतुलित नहीं है तो फुंसी लम्बे समय तक निकल सकती है। शुरुआत में फुंसी हल्के लाल या गुलाबी रंग की होती है। पकने के बाद इसमें से पीले रंग की मवाद निकलती है। मवाद निकलने तक इनमें बहुत दर्द होता है। अगर फुंसी गहरी और बड़े आकर की होकर फूटती है तो उस जगह गड्ढ़े पड़ सकते है।  

ब्लैकहेड्स (Blackheads)

ब्लैकहेड्स एक तरह की कील होती है जोकि छूने में सख्त और निकलने पर धागे के रेशे जैसी दिखती है। ब्लैकहेड्स नाक और ऊपरी होंठ (Upper Lips) पर ज्यादा होते है। हालांकि ये आपके पूरे चहरे पर भी हो सकते है। यह किसी भी उम्र में हो सकते है। इसके होने का मुख्य कारण रोमछिद्रों में धूल मिट्टी का भरना होता है। ब्लैकहेड्स को आसानी से मलकरके (Scrub) निकला जा सकता है। लकिन अगर ये बहुत बड़े हो जाते है तो ब्लैकहैड रिमूवर उपकरण का उपयोग करना चाहिए।    

व्हाइटहेड्स (Whiteheads)

व्हाइटहेड्स भी ब्लैकहेड्स एक तरह ही एक कील होती है। इसका रंग सफ़ेद होता है और ये ब्लैकहेड्स की तुलना में थोड़ा नरम होते है। ये ज्यादातर नाक के आसपास वाली जगह पर निकलता है। ये माथे और होंठ पर भी हो सकता है। इनको भी मलकर (Scrub) निकला जा सकता है।

पेपुल्स (Papules)

पेपुल्स त्वचा के संक्रमण की वजह से नहीं बल्कि कीड़े के काटने से होता है। यह हल्के गुलाबी रंग का होता है। कभी कभी पेपुल्स खाने से होने वाली एलर्जी की वजह से भी हो जाता है।

नोड्यूल्स (Nodules)

नोड्यूल्स मुख्यता स्टेरॉइड्स के अत्यधिक सेवन के कारण होता है। नोड्यूल्स दूसरे किसी भी पिम्पल की तुलना में आकार में बड़े और चपटे होते है। यह त्वचा में बहार की बजाये अंदर की ओर बढ़ते है। इनमें बहुत अधिक दर्द होता है। 

गाँठ (Cystic Pimples)

गाँठ समूह में निकलते है या फिर ये एक बड़े आकार के फोड़े जैसा भी हो सकता है। इसमें पीले रंग की मवाद भरी होती है और दर्द के साथ साथ सूजन भी रहती है।

पिम्पल का आधुनिक उपचार (Modern Treatment for Pimple)

पिम्पल का उपचार लगभग हर चिकित्सा पद्धति में पाया जाता है। भारत में पिम्पल के उपचार के लिए एलोपैथी, आयुर्वेद और होमेओपेथ चिकित्सा पद्धतियों का ज्यादा उपयोग होता है। ऐलोपैथ चिकित्सा बाकी पद्धतियों से ज्यादा खर्चीली होती है। इसमें मुख्य रूप से लेज़र उपचार (Laser Treatment) और भिन्नात्मक रेडियोफ्रीक्वेंसी तकनीक (Fractional Radiofrequency Techniques) विधि का प्रयोग होता है। 

लेज़र से उपचार (Laser Treatment)

यह उपचार बाकी चिकित्सीय उपचार की तुलना में महंगा होता है। इसमें पिम्पल युक्त त्वचा पर प्रकाश की किरणें डाली जाती है। जोकि संक्रमित त्वचा से संक्रमण को ख़तम करके उस जगह नई त्वचा कोशिकाओं को पनपने में मदद करती है। ये विधि बहुत ही तेज़ है और इसमें समय भी कम लगता है। इसमें आपको अस्पताल में भर्ती होने की जरुरत नहीं पड़ती है और आप उपचार के तुरंत बाद अपना दैनिक कार्य कर सकते है।

भिन्नात्मक रेडियोफ्रीक्वेंसी तकनीक (Fractional Radiofrequency Techniques)

यह विधि आम लोगों में कॉस्मेटिक डर्मेटोलॉजिस्ट उपचार (Cosmetic Dermatologist Treatment) के नाम से ज्यादा जानी जाती है। इस विधि में पिम्पल का उपचार शल्य चिकित्सा के माध्यम से किया जाता है। इस विधि में झुर्रियां, पिम्पल्स और दाग- धब्बों को सूक्ष्म सुईओं (Micro-needles) के माध्यम से हटाया जाता है।

पिम्पल्स के घरेलु उपचार (Home Remedies for Pimples)

पिम्पल हटाने के बहुत से घरेलु उपचार मौजूद है जिसका उपयोग भारत में बहुत लम्बे समय से होता चला आ रहा है। घरेलु उपचार न केवल सस्ते अपितु लाभकारी भी होते है। इसमें उपयोग होने वाली सभी सामग्रियां प्राकृतिक होती है और रसायनों का उपयोग लगभग न के बराबर होता है। जिसकी वजह से आपको पार्श्व प्रभाव (Side Effect) का सामना नहीं करना पड़ता। आप आसान से घरेलु उपायों को करके असरदार तरीके से पिम्पल्स से छुटकारा पा सकते है। आइयें हम कुछ आसान से घरलू उपचारों के बारें में जानें।

हल्दी और गुलाबजल

हम सब जानते है की हल्दी में जीवाणुरोधी गुण पाया जाता है। इसके इस्तेमाल से बैक्टीरिया को बढ़ने से रोका जा सकता है। इसके लिए आप आधा चम्मच हल्दी को गुलाबजल में अच्छे से मिलकर मिश्रण तैयार करलें। इस तैयार मिश्रण को रात में सोने से पहले पिम्पल्स पर अच्छे से लगा लें। सुबह अपने चहरे को सादे पानी से अच्छे से धो लें। ऐसा लगातार करने से आपके पिम्पल्स बहुत जल्दी ठीक हो जायेंगे और चहरे पर दाग भी नहीं रहेंगे।

मुल्तानी मिटटी

मुल्तानी मिटटी को पिम्पल के उपचार में रामबाण की तरह माना गया है। आपकी त्वचा से अत्यधिक तेल और गन्दगी हटाने में ये बहुत ही कारगार है। मुल्तानी मिटटी को गुलाबजल में मिलाके मिश्रण तैयार करलें, इस मिश्रण को रोज़ अपने चहरे पर लगाएं। लेप सूख जाने पर सादे पानी से चेहरा धोलें। ऐसा लगातार करने से न केवल पिम्पल्स गायब हो जाएँगी बल्कि आपका चेहरा भी चमकदार हो जायेगा।

 एलोवेरा

एलोवेरा में बहुत से औषधिये गुण पाए जाते है। एलोवेरा के गूदे का आप जूस भी बनाके पी सकतें है। एलोवेरा के गूदे को रोज़ रात सोने से पहले अपने चहरे पर लगाएं। एलोवेरा प्रतिउपचायक (Antioxidant)  की तरह काम करता है। इसमें मौजूद जीवाणुनाशक गुण पिम्पल्स को बहुत जल्दी ठीक करते है। इसके इस्तेमाल से त्वचा चमकदार और मुलायम हो जाती है।   

सेब का सिरका (Apple Cider Vinegar)

सेब के सिरके को पानी के साथ बराबर अनुपात में मिलाके मिश्रण तैयार करलें। इस तैयार मिश्रण को पिम्पल पर पंद्रह से बीस मिनट तक लगाके रखें। समय पूरा होने पर चहरे को सादे पानी से अच्छे से धोलें। ऐसा नियमित करने से पिम्पल्स बहुत जल्दी ठीक हो जाते है।

नीम

नीम में बहुत से आयुर्वेदिक गुण पाए जाते है। नीम में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीइंफ्लेमेटरी तीनों ही गुण पाए जाते हैं। पिम्पल की रोकधाम में नीम बहुत उपयोगी होती है। नीम के पत्तों को पीस करके पेस्ट बनालें और इसमें नीम्बू या शहद मिलकर अपने चहरे पर नियमित लगाएं। पिम्पल्स बहुत जल्दी ठीक हो जायेंगे और आपके चहरे पर कोई दाग भी नहीं बनेगा।

पिम्पल्स से बचाव कैसे करें (How to Prevent Pimples)

जैसा की कहा जाता है कि इलाज से बेहतर रोकथाम है। किशोरावस्था में पिम्पल्स का होना प्राकृतिक है। पर हम कुछ उपायों को अपनाकर पिम्पल्स का निकलना कम कर सकते है। पिम्पल्स के बचाव के लिए हमें कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे कि: –

१. रोजाना ५ लीटर या १० से १२ गिलास पानी पिए।

२. रोज़ दिन में तीन से चार बार पांच मिनट तक अपने चहरे को ठन्डे पानी से धोएं।

३. संतुलित और पौष्टिक आहार लें। फ़ास्ट फ़ूड और जंक फ़ूड के सेवन से बचें।

४. धूप में ज्यादादेर तक न रहे और अपने चहरे को ढक कर रखें।

५. नियमित तौर पर योग और कसरत करें।

६. जितना हो सके तनावों से दूर रहे।

७. हफ्ते में कम से कम एक बार चहरे को मलाई से मलें।

८. चिकने और तैलाक्त (Greasy & Oily) सौंदर्य पदार्थों का उपयोग न करें।

९. पानी आधारित (Water Based) सौंदर्य पदार्थों का इस्तेमाल करें।

१०. भरपूर नींद लें।    

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