Cocktail Therapy

कॉकटेल से होगा कोरोना का 100% खात्मा – एक नई उम्मीद!!

कॉकटेल ड्रग थेरेपी (Cocktail Drug Therapy) जिसने अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ठीक किया !!!
उसी कॉकटेल ड्रग थेरेपी का इस्तेमाल अब भारत में!! कोरोना वायरस संक्रमण से लड़ने के लिए भारत को एक और
हथियार मिला है। कोरोना महामारी के शुरुआत से विश्व के विभिन्न देश इसके प्रकोप को रोकने और उपचार पर
लगातार शोध कर रहे है। कोरोना वायरस के पहले प्रकोप के दौरान भारत में प्लाज्मा थेरोपी से बहुत अच्छे परिणाम
देखने को मिले थे। परन्तु समय के साथ कोरोना वायरस संक्रमण ने अपने प्रारूप को बदल लिया है। नए विषाणु
प्रारूप से लड़ने के लिए भी निरंतक प्रयास जारी है। इस कड़ी में भारत के मरीजों के लिए एक खुसखबरी आयी है।
COVID-19 संक्रमण से लड़ने के लिए एक नई पद्धति का ईजाद किया है जिसका नाम है – कॉकटेल ड्रग थेरेपी
(Cocktail Drug Therapy)!!!


भारत में कॉकटेल ड्रग थेरेपी का पहला परिक्षण मई में गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में एक ८४ साल के वृद्ध पर किया
गया है। कॉकटेल ड्रग थेरेपी दरअसल दो दवाओं का मिश्रण है जो किसी वायरस पर एक जैसा असर करती है।
अमरीका और यूरोप में पहले ही इसके इस्तेमाल को मंजूरी दे दे गई है। और अब भारत में भी इस पद्धति का उपयोग
करके उपचार की तैयारी है। इस दवा के इस्तेमाल से मरीजों के मृत्युदर में ७०% तक कमी आ जाती है। यहाँ तक की
अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को कोरोना संक्रमण होने पर यही दवा दी गई थी और ये दवा किया जा रहा
है कि इसी दवा को लेने की वजह से वो जल्दी स्वस्थ हो गए थे।
कॉकटेल ड्रग थेरपी क्या है, कैसे काम करती है, संक्रमण पर प्रभावी है कि नहीं, क्या ये सुरक्षित है आदि बहुत से
सवाल आपके मन में उठते है। तो आईए हम विस्तार से इस थेरोपी के बारें में बताते है।

कॉकटेल ड्रग थेरोपी क्या है

कॉकटेल ड्रग थेरोपी का लम्बे समय से अमरीका और यूरोप में परिक्षण जारी है। इस
पद्धति में इस्तेमाल होने वाली दवा का निर्माण दो दवाओं (Casirivimab & Imdevimab) को मिश्रित करके
बनाया जाता है जो किसी वायरस पर सामान असर डालती है। इन दवाओं में इस्तेमाल होने वाली एंटीबाडीज का
विकास एक नियंत्रित वातावरण में उच्च तकनीक से सम्प्पन बायोटेक्नोलॉजी प्रयोगशाला में किया जाता है।

ये कैसे काम करती है

कॉकटेल ड्रग थेरपी में दी जाने वाली दवा में जो एंटीबाडी पाए जाते है उनका काम है
कोरोना वायरस के वृद्धि को रोक देना। ये दवा मरीज के शरीर में मौजूद वायरस को चारो तरफ से घेर लेती है जिससे
उसको बढ़ने के लिए जरुरी प्रोटीन का मिलना बंद हो जाता है, जिसकी वजह से वायरस भुखमरी की वजह से मर
जाता है। इस दवा का इस्तेमाल सभी कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए किया जा सकता है परन्तु इसका इस्तेमाल उन
मरीजों के लिए मना है जिनको बहुत ज्यादा संक्रमित हो गए हो या फिर जिनको ऑक्सीजन पर रखा गया हो।

क्या Cocktail Drug Therapy प्रभावी है?

मरीज में वायरस संक्रमण पाए जाने के पहले सप्ताह, जिसको चिकित्सा की भाषा में वायरल
फेज कहते है, में अगर इसका इस्तेमाल चालू कर दिया जाये तो ये बहुत प्रभावी साबित होता है। अमरीका और यूरोप
में इसपर बहुत ज्यादा शोध किया गया है और ये पाया है कि खासकर वो लोग जो वृद्ध है, जिनको मधुमेह की
बीमारी, रक्तचाप, कैंसर, गुर्दे और जिगर की बीमारी आदि मरीजों पर भी बहुत प्रभावी हुआ है। शोध में ये भी पाया
गया है कि सही समय पर इलाज शुरू करने से ७०% से ८०% ऐसे मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की जरुरत नहीं
पड़ी। और जिनको भर्ती होना भी पड़ा उसमें भी ७०% से ८०% लोगों की जान बच गई। ऐसे बिमारियों से ग्रषित
लोगों का कोरोना संक्रमण का उपचार बहुत ही जोखिम भरा होता था। परन्तु कॉकटेल ड्रग आने के बाद के बाद
उनका उपचार करना बहुत ही सुरक्षित हो गया है।

क्या ये ड्रग थेरेपी सुरक्षित है?

अब तक इस दवाई पर हुए शोध और इसके व्यापक इस्तेमाल से ये बात उभरकर सामने आयी
है कि ये दवाई पूरी तरह से सुरक्षित है। कोरोना संक्रमित मरीज को इसको लगाने के बाद एक घंटे गहन निगरानी में
रखा जाता है। इस दवा के इस्तेमाल से अब तक किसी भी मरीज में खतरनाक पार्श्व प्रभाव देखने को नहीं मिले है।
एकाद मामलों में मरीज में तीवग्राहिता (Allergy) देखने को मिला है पर वो भी एंटी एलर्जिक दवाओं से ठीक हो गई
है।

दवा कैसे दी जाती है

कॉकटेल ड्रग को मरीज को दो तरीको से दिया जा सकता है। इसको किसी साधारण
इंजेक्शन की तरह नसों में (Intravenous) दिया जा सकता है या फिर मधुमेह के मरीजों को जैसे इन्सुलिन का
इंजेक्शन दिया जाता है वैसे भी लगाया जा सकता है। इस दवा को लगाने में २० से ३० मिनट का समय लगता है।
दवा लगने के बाद मरीज को कम से कम एक घंटा डॉक्टर की निगरानी में रहना चाहिए। जिससे किसी पार्श्व प्रभाव
का तुरंत इलाज किया जा सके।

बच्चो में इसका इस्तेमाल

कॉकटेल ड्रग थेरेपी के शोध में ये पाया गया है कि इस दवा का इस्तेमाल १२ साल से
बड़े बच्चों पर किया जा सकता है जिनका न्यूनतम वजन ४० किलोग्राम हो।

अभी ये दवा कहा मिलेगी

कॉकटेल ड्रग का इज़ाद अमरीका की दवा निर्माता कंपनी रीजेनरॉन और रोश
(Regeneron and Roche) ने किया है। इस दवा निर्माता को भारत सरकार की तरफ से आपातकालीन इस्तेमाल
की मंजूरी मिल चुकी है। भारत में ये दवा प्राधिकृत वितरक दवा निर्माता सिप्ला (Cipla) के माध्यम से मिलेगी।
फिलहाल सरकार की मंजूरी के बाद इसका इस्तेमाल गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में हो रहा है। कॉकटेल दवा की
पहली खेप अगले हफ्ते के शुरुआत में मिलनी शुरू हो जाएगी। एक बार इस्तेमाल की जानी वाली दवा की खुराक जो
१२००mg की होती है कि कीमत तकरीबन ₹59,750/- रूपए रखी गई है। इसी दवा की बहु खुराक का पैक, जिसे
दो मरीजों को लगाया जा सकता है, की कीमत ₹1,19,500/- रूपए है। इस दवा को २ से ८ डिग्री सेल्सियस पर
रखा जाता है।

इतने प्रभावशाली उपचार के आने के बाद भी हमें ये नहीं भूलना चाहिए की कोरोना संक्रमण एक महामारी है।
कोरोना वायरस से अब तक विश्व भर में १७ करोड़ से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके है और लगभग ३४ लाख से
ज्यादा लोग अपनी जान गावं चुके है। सरकार ने व्यापक पैमाने पर टीकाकरण कार्यक्रम चलाया हुआ है। ये हमारी
जिम्मेदारी बनती है की हम समय पर टिका लगवा लें और साथ ही साथ हम सरकार और भारतीय आयुर्विज्ञान
संसथान द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करें और सुरक्षित रहे। चहरे पर मास्क लगाएं और २ गज की दूरी बनाये
रखें।

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