मोदी और योगी

भारत का भविष्य – मोदी और योगी – परिवर्तन का आरम्भ

हिन्दुओं को फिर से सशक्त करना, देश में जयश्री राम का नारा बुलंद करना, जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना, तीन तलाक पर लगाम कसना, पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक्स करना, राम मंदिर का निर्माण करवाना, कैराना में हिन्दू परिवारों की वापसी, धर्मांतरण एवं लव जिहाद पर शिकंजा कसना, 2014 के बाद से देश में एक भी दंगों का न होना आदि अनगिनत कार्य मोदी और योगी के आने के बाद ही संभव हो पाए है।

कट्टरपंथियों की नाक में दम करने वाली शख्सियत है – मोदी और योगी। कट्टरपंथियों और वामपंथियों द्वारा भारत की आजादी से लेकर साल 2014 तक सनातन धर्म को अपमानित किया जाता रहा है। जिनका समर्थन मौजूदा केंद्र और राज्य सरकारें भी करती रही। अपनी अहिंसक प्रकृति और सभी धर्मों के बीच समानता में विश्वास करने के कारण सनातन धर्म ने हमेशा शांतिपूर्ण तरीकों से मामलों को सुलझाने की कोशिश करते रहे। 

परन्तु राजनीतिक समर्थन प्राप्त इन कट्टरपंथियों की उद्दंडता समय के साथ बढ़ती ही चली गई। सांप्रदायिक दंगे, लव-जिहाद, धर्मांतरण आदि हथकंडों का प्रयोग करके सनातन धर्मावलम्बियों के मध्य दहशत का माहौल बना कर रखा। प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भी सनातन धर्म की कोई सुनवाई नहीं होती थी। जिससे सनातन धर्म के अनुयायियों के मध्य हमेशा असुरक्षा का माहौल बना रहता था। 

मोदी और योगी – परिवर्तन का आरम्भ

माननीय नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ जी देश के पहले दो व्यक्ति है जिन्होंने सत्ता में आने के लिए मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने का कार्य नहीं किया। इन्होनें हिंदुत्व की कमजोर हो रही नींव को सशक्त करके का कार्य किया है। जिसके परिणाम स्वरुप हिन्दुओं ने इन्हें पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज करवाया।

मोदी और योगी के आने से हिंदुत्व को एक बल मिला है। मेरा मानना है कि मोदी और योगी एक ही शख्सियत के दो रूप है। इनकी कथनी और करनी में कोई अंतर देखने को नहीं मिलता है। हिन्दुओं के लिए मोदी और योगी सिर्फ एक नाम नहीं अपितु उनकी भावनाओं को व्यक्त करने का एक माध्यम है, एक चेहरा है।

हिंदुओं के दिलों और अवचेतन मन में विश्वासघात के दर्द और कुछ बहुत गहरे घाव है, जिसे उन्होंने मोदी और योगी के आने से पहले कभी व्यक्त नहीं कर पाए थे। इनकी उपस्थिति ने हिन्दुओं को अपनी व्यथा व्यक्त करने का एक मौका दिया है। जिन राजनीतिक और प्रसाशनिक गलियारों से इनको अपमानित करके भगा दिया जाता था। आज वहाँ इनको सम्मान की दृष्टि से देखा जाने लगा है।   

मोदी और योगी ने देश में परिवर्तन की एक नई लहर को जन्म दिया है। इन्होने कट्टरपंथियों एवं वामपंथियों को हिन्दुओं की ताकत का अनुभव करवाया है। आज से पहले किसी भी राजनीतिक दल को हिन्दुओं के वोटों की परवाह नहीं थी। सभी राजनीतिक दल सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम मतदाताओं को खुश करने के पीछे पड़े रहते थे। मुसलमानों को खुश करने के लिए हिन्दुओं पर अत्याचार करने से भी हिचकते नहीं थे। परन्तु इन्होनें विरोधियों की सोचों को बदलने पर मजबूर कर दिया।

कटु एवं ज्वलंत सवाल?

लेकिन हमें इस परिवर्तन की जरुरत आखिर क्यूँ पड़ी? हिन्दुओं की ऐसी दयनीय हालत का जिम्मेदार कौन है? धर्मनिरपेक्षता क्या सिर्फ हिन्दुओं के लिए है? गंगा-जमुनी तहजीब की सच्चाई क्या है? अल्संखयक के नाम पर दंगे करने की छूट क्यूँ है? आखिर भारत को मोदी और योगी जैसी नेताओं की जरुरत क्यूँ है? ऐसे बहुत से सवाल है जो आपको खुद और समाज से पूछने चाहिए। लेकिन शायद आप पूछने से डरते है।

इनमें से कुछ कटु और ज्वलंत सवालों के जवाब आज हम आपको इस लेख के माध्यम देने की कोशिश कर रहें है। इसके साथ ही हम आपको इस देश के भविष्य के लिए मोदी और योगी की उपयोगिता भी सिद्ध करते जाएंगे।

गंगा-जमुनी तहजीब – सच या भ्रम

गंगा जमुनी तहजीब

15 मिनट पुलिस हटा लो, 15 करोड़ लोग 100 करोड़ पर भरी पड़ेंगें – क्या ऐसी है हमारी गंगा-जमुनी तहजीब। आखिर क्या है ये ‘गंगा-जमुनी तहजीब’? गंगा भी यहाँ की, जमुना भी यहाँ की, फिर कैसे गंगा और जमुना हिन्दू मुस्लिम एकता का प्रतीक बन गई? कैसे हिन्दुओं ने इनके द्वारा सदियों के अत्याचारों एवं शोषण को भुला कर इस तहजीब को अपनाया?

ये सवाल लगातार बना रहा परन्तु इसपर बात करने की हिम्मत अब तक कोई नहीं कर सका। मोदी और योगी के आने बाद अब लोग इसपर चर्चा करने लगे है। लोगों ने अब इस सच्चाई को स्वीकार करना शुरू कर दिया है कि गंगा-जमुनी तहजीब केवल एक कल्पना है जिसका प्रचार-प्रसार एक विशेष राजनीतिक पार्टी एवं अभिजन वर्ग द्वारा अपने कर्मों को  छुपाने एवं मुस्लिम आंक्रताओं को महान दर्शाने के लिए किया गया। क्यूंकि भारतीय इतिहास में ऐसी किसी तहजीब का जिक्र ही नहीं है।

भारत के इतिहास की गहराइयों में झाँकने से पता चलता है कि कैसे देश में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच हमेशा से तनाव, टकराव और संघर्ष रहा है और देश पर इस्लामी आक्रमण, दमन और हिन्दुओं के कत्लेआम का पर्याय है। मुस्लिम राजाओं द्वारा हिन्दुओं की हत्या, ज़बरदस्ती धर्मांतरण, हिन्दुओं स्त्रियों का अपमान एवं शोषण, मंदिरों का विध्वंश और गैर-मुस्लिम पर जजिया कर लगाया जाना आदि इसका उदहारण बताते है।

भारत के आजादी के संघर्ष के दौरान कई बार हिन्दू मुस्लिम दंगें हुए। मुसलमानों ने अपने लिए अलग राष्ट्र की मांग की गई। जिसके परिणामस्वरूप 1947 में भारत के तीन टुकड़े हो गए। इससे भी मन नहीं भरा तो इन्होने नवनिर्मित पाकिस्तान में बसे हिन्दुओं का कत्लेआम शुरू कर दिया। मुसलमानों ने 1947 में हिटलर से भी बड़ा और भीभस्त नरसंहार किया। तब किसी ने भी गंगा-जमुनी तहजीब की बात नहीं की। परन्तु जैसे ही हिन्दुओं ने आतंक का प्रतिकार किया उनको शांति और हिन्दू-मुस्लिम एकता का पाठ पढ़ाया गया। आमरण अनशन की घमकियां दी गई। आखिर हिन्दुओं के साथ ऐसा दोगलापन क्यूँ?   

इस सच्चाई को समझने के लिए हमें इतिहास में थोड़ा पीछे जाना पड़ेगा।

भारत के इतिहास से छेड़छाड़ – आक्रांताओं का महिमामंडन

इतिहास, दुनिया पर हुए मुसलमानों के अत्याचारों से भरी पड़ी है। भारत में मोहमद बिन कासिम की लूट और हत्याओं से शुरुआत, गजनवी और गुलाम वंश के अंधे बर्बर शासक, खिलजी की धर्मांधता के साथ क्रूरता, तुगलक वंश की ईद के दिन हिन्दू लड़कियों की सरेआम नुमाईश और अपने स्वधर्मियों को गुलाम के तौर दे देना, मुगलिया सल्तनत के धार्मिक जिहादी सुल्तानों द्वारा इंसानियत के रूह कंपाने वाले अत्याचारों के बाद भी आखिर ऐसा क्या हुआ कि हिन्दू आजादी के पिचहत्तर साल बाद भी सेक्यूलर होने का राग अलापते है।

भारत में आजदी से पहले भी और बाद में भी हिन्दुओं के मन में मुसलमानों के प्रति बहुत आक्रोश था। इस आक्रोश को एक सोची समझी राजनीतिक साज़िश के तहत हिन्दु-मुस्लिम एकता में बदलने की कोशिश की गई। भारत की आजादी से लेकर लगभग 30 सालों तक भारत के शिक्षा मंत्री मुस्लिम रहे। इन्होनें इतिहास के साथ छेड़छाड़ करते हुए मुस्लिम आक्रांतों को महान भारतीय नायकों के रूप में प्रस्तुत किया और भारतीय राजाओं को कमजोर और विलासी बताया। अपनी बात को सच सिद्ध करने के लिए इन्होनें खुलकर गंगा-जमुनी तहजीब का उपयोग किया।

इन्होनें अपनी बातों का इस तरह प्रचार-प्रसार किया कि तर्क संगत बातें करने वाला सनातन धर्मी भ्रमित हो जाए। और जिन लोगों ने इसपर सवाल उठाया, उनको हिन्दू-मुस्लिम एकता का दुश्मन करार दे दिया गया। जिसका नतीजा ये हुआ कि धर्मनिरपेक्षता का कीड़ा धीरे-धीरे हिन्दू धर्म को दीमक की तरह चाट गया।

धर्मनिरपेक्षता की वर्त्तमान स्थिति – पलायन करता हिन्दू

सामूहिक पलायन

सनातन धर्मी धर्मनिरपेक्षता का राग अलापता शांति पूर्ण जीवन की कामना करता हुआ जीता जा रहा है। परन्तु के मुसलमानों ने भी धर्मनिरपेक्षता का पालन किया है। नीचे हम कुछ घटनाओं का उल्लेख कर रहे है जिससे आप समझ जाएंगे कि धर्मनिरपेक्षता सिर्फ हिन्दुओं को मूर्ख बनाने का एक ढोंग है।

  • 19 जनवरी 1990, कश्मीर के मस्जिदों से घोषणा की गई कि कश्मीरी पंडित काफिर है। कश्मीरी पंडितों को या तो इस्लाम अपनाना होगा या फिर मरना होगा। इसके अलावा पुरुष अपनी स्त्रियों और लड़कियों को छोड़ कर कश्मीर से जा सकते है। इस घोषणा के बाद कश्मीरी मुसलमानों के पंडितों के घरों के पहचान करके उनको मारना और स्त्रियों का बलात्कार करना शुरू कर दिया। जिसका परिणाम लाखों कश्मीरी पंडितों के कश्मीर से पलायन के रूप में सामने आया।
  • 27 फ़रवरी 2002, गुजरात के गोधरा रेलवे स्टेशन पर खड़ी साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में मुस्लिम भीड़ के द्वारा आग लगा दी है जिसके कारण अयोध्या से लौट रहे 59 हिंदू तीर्थयात्री और कारसेवक की जल कर मौत हो गई। यह घटना इतिहास में गोधरा कांड के नाम से दर्ज है। अदालत ने घटना और अपराध की साजिश के लिए 31 मुस्लिम व्यक्तियों के एक समूह को दोषी पाया।
  • 2013 मुज़फ्फरनगर दंगे, जहाँ बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने पर मुसलमानों द्वारा दो हिन्दू लड़को की हत्या कर दी जाती है। जिसका परिणाम हिन्दू-मुस्लिम दंगों के रूप में सामने आता है।
  • साल 2014-16 के मध्य कैराना और कांधला, उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर हिन्दू परिवार मुस्लिम कट्टरपंथियों के भय से पलायन कर जाता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के अनुसार कैराना शहर में बहुसंख्यक मुसलमानों द्वारा हिन्दू महिलाओं के खिलाफ भद्दे/ ताने मारे जाते है और उनसे अक्सर छेड़छाड़ की जाती है। जिसके डर से वे बाहर नहीं निकलती है। मुस्लिम अत्याचारों से तंग आकर अंत में हिन्दू परिवारों ने पलायन का फैसला लिया। इस घटना को कैराना हिन्दू पलायन के रूप में भी जाना जाता है। 
  • जून 2019 मेरठ के प्रह्लाद नगर के 125 हिन्दू परिवारों ने मुस्लिम अत्याचार से बचने के अपने घरों से पलायन कर, दूसरी जगहों पर बस गए। यहाँ पर बहुसंखयक मुस्लिम हिन्दुओं की महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करते और उनको धमकियाँ देते थे। जिससे तंग आकर हिन्दू परिवार पलायन कर गए।
  • मई 2021 मुस्लिम समुदाय के गुंडों द्वारा उत्पीड़न का हवाला देते हुए दलित हिन्दू नूरपुर, अलीगढ से पलायन करने पर मजबूर हुए और अपने घरों के बाहर ‘घर बिकाऊ है’ के बैनर लगाए।

इन घटनाओं का यहाँ उल्लेख करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्यूंकि ये सभी घटनाएं मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में घटित हुई है। जिन शहरों में मुस्लिम बहुल होते जा रहे है वहां-वहां से हिन्दुओं को आतंकित करके भगाया जा रहा है। और ये सिलसिला तबतक चलता रहेगा जबतक की भारत पाकिस्तान नहीं बन जाता। ये घटनाएं दर्शाती है कि धर्मनिरपेक्षता सिर्फ एक ढकोसला है जिसे हिन्दुओं को कमजोर करने के लिए उपयोग किया जा रहा है।

वर्तमान परिस्थिति का जिम्मेदार कौन?

निःसंदेह आज हिन्दुओं की हालत के जिम्मेदार स्वयं हिन्दू ही है। मेरा मानना है कि हिन्दू समुदाय एक नमक हराम समुदाय है। इन्होनें अपनी संस्कृति और सभ्यता के साथ विश्वासघात किया है। सनातन धर्मी जो अपने ज्ञान और तर्क शक्ति के लिए विश्वविख्यात थे, उन्होंने अपनी इस शक्ति को लोप हो जाने दिया। हिन्दू राजाओं, सिख गुरुओं और उन अनगिनत सनातन धर्मियों के बलिदान को भुला दिया जिन्होंने हिन्दू धर्म की रक्षा हेतु अपना सर्वश्व बलिदान कर दिया।

आज कितने ही हिन्दू है जोकि मुस्लिम दरगाहों पर जाकर माथा टेकते है। क्या कभी किसी हिन्दू ने इन दरगाहों की सच्चाई जानने को कोशिश की? इन कब्रों में दफ़न मुसलमानों के द्वारा हिन्दुओं पर किये अत्याचारों के बारें में सुनेगें तो आपकी रूह कांप जाएगी। लेकिन फिर भी हिन्दू समुदय सच्चाई जाने बिना इनकी कब्रों पर चादर चढ़ाते है। क्या हिन्दुओं का अपने देवी-देवताओं से विश्वाश उठ गया है? यह हिन्दू-मुस्लिम एकता का कैसा भ्रम जाल है जिसने हिन्दुओं को अपने ही धर्म से दूर कर दिया है?

धर्मनिरपेक्षता के नाम पर अपने गुस्से को उजागर न करना, हिन्दुओं की सबसे बड़ी कमजोरी रही। जिसका लाभ मुसलमानों ने उठाया और सनातन धर्म की जड़ें कमजोर करते गए। परन्तु स्थिति भयावह रूप लेती इससे पहले ही मोदी और योगी के युग का उदय हो गया। इन्होनें हिन्दुओं की दयनीय स्थिति को संभाला और एक नए राष्ट्र के निर्माण की नींव रखी है।

देश के भविष्य के लिए जरुरी – मोदी और योगी

अबतक हमने आपको जो भी घटनाक्रम बताएं, वो सिर्फ एक अंश मात्र है। भारत के विभिन्न हिस्सों में अभी भी मुस्लिम बहुल इलाकों में हिन्दुओं पर अत्याचार किये जा रहे है। साथ ही देश के इस्लामीकरण का एजेंडा भी चलाया जा रहा है। जिनका दमन करना बहुत जरुरी है।

मोदी और योगी के आने से पहले देश के इस्लामीकरण का विरोध करने की हिम्मत किसी राजनीतिक पार्टी या राजनेता द्वारा नहीं की गई। इन्होनें इस्लामीकरण का खुलकर विरोध किया और हिन्दुओं को भी इसके लिए प्रेरित किया। इन्होने कमजोर हो चुकी सनातन धर्म की आस्था का सशक्तिकरण किया। सनातन धर्मियों को उनके स्वर्णिम इतिहास से पुनः अवगत कराया। हिन्दुओं के मध्य एक विश्वास जगाया। उनको अपनी खोई गरिमा वापस पाने में मदद की। अत्याचार का फिर से सामना करने की हिम्मत पैदा की।

मोदी और योगी से हिम्मत प्राप्त करके हिन्दुओं ने अपने अंदर छुपे दर्द और अत्याचार के खिलाफ बोलना शुरु किया। हिन्दुओं के मुँह से सच्चाई सुनकर कट्टरपंथीयों और वामपंथियों के मध्य खलबली मच गई। इनसे हिन्दुओं का फिर से मुखर होकर बोलना अच्छा नहीं लगा। इससे इनके मुस्लिम तुष्टिकरण और देश के इस्लामीकरण के एजेंडे पर बहुत बुरा असर पड़ा और इन्होने मोदी और योगी को बदनाम करने के बहुत से हथकंडे अपनाए। परन्तु एकजुट हिन्दू ने उनके सभी प्रयासों को विफल कर दिया।

इसके अलावा मोदी और योगी ने देश के विकास को एक नई गति प्रदान की है। देश के भ्रष्ट हो चुके सरकारी तंत्र में सुधार किया। विकास की लंबित और नई परियोजनाओं को समय पर पूरा न करने वाली कंपनियों और ठेकेदारों पर जुर्माना लगाया। जिसके फलस्वरूप परियोजनाएं समय पर पूरी होने लगी। देश के किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाना, फसल बीमा योजना, किसान सम्माननिधि आदि के माध्यम से किसानों को मजबूती प्रदान की। इन्होने देश के चौमुखी विकास के साथ-साथ देश के दुश्मनों का भी दमन किया है।

भारत जैसे विकासशील देश को एक मजबूत नेतृत्व की जरुरत थी। जिसकी कमी मोदी जी के आने से पूरी हो गई। आगे चलकर इस जिम्मेदारी को योगी जी अच्छे से वहन कर सकते है। भारत सनातन धर्मियों की भूमि है और अगर इसका इस्लामीकरण रोकना है तो सभी हिन्दुओं को एकजुट होकर मोदी और योगी को और मजबूत करना होगा। हिन्दुओं की भलाई के लिए इनका सत्ता में बने रहना बहुत जरुरी है। ऐसा तभी संभव है जब हिन्दू आपस के मदभेद भुलाकर इनका समर्थन करें।

 

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